योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, सहायता प्राप्त और वित्त विहीन स्कूलों के कर्मचारियों को मुफ्त इलाज की सुविधा

लखनऊ
 बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सहायता प्राप्त और वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षकों के बाद अब यहां के कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को इलाज के लिए अपनी जेब से खर्च करने की चिंता नहीं करनी होगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इन कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी गई। इसके तहत सरकारी अस्पतालों के साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी भर्ती होकर इलाज कराने की सुविधा मिलेगी।

कैबिनेट बैठक के बाद निर्णयों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि मंगलवार को कुल 22 प्रस्ताव आए थे और सभी पास हो गए हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत बेसिक शिक्षा परिषद, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल, वित्त विहीन विद्यालयों और समग्र शिक्षा परियोजना में कार्यरत कार्मिकों को इस योजना का लाभ मिलेगा। इसके अलावा माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहायता प्राप्त एवं वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालयों, संस्कृत विद्यालयों और संस्कृत महाविद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कुल 1,22,304 कार्मिकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा। इनके लिए प्रति कार्मिक तीन हजार रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से सरकार पर सालाना 36.69 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा।

योजना का क्रियान्वयन स्टेट एजेंसी फार काम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। इसी प्रकार माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत 48,062 कर्मचारियों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा। इनके लिए भी प्रति कर्मचारी तीन हजार रुपये वार्षिक प्रीमियम के हिसाब से करीब 14.42 करोड़ रुपये का सालाना खर्च अनुमान है।

कैशलेस इलाज की सुविधा राजकीय अस्पतालों और साचीज से संबद्ध निजी अस्पतालों में मिलेगी। उपचार के लिए वही दरें लागू होंगी, जो प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) की ओर से समय-समय पर निर्धारित की जाएंगी।