पटना
स्थानीय निकायों को विकास कार्यों के लिए मात्र 30 प्रतिशत निधि आवंटित होगी। यह व्यवस्था 2026-27 सहित अगले वित्तीय वर्ष (2027-28) के लिए प्रभावी होगी।
सातवें राज्य वित्त आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में इसकी अनुशंसा की है, जिसे सरकार ने स्वीकृति दे दी है। स्थानीय निकायों में त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थान और शहरी निकाय आते हैं।
जिनके लिए सातवें राज्य वित्त आयोग ने राशि के आवंटन का फार्मूला तय कर दिया है। हस्तांतरित की जाने वाली राशि पिछले वित्तीय वर्ष के अपने शुद्ध कर राजस्व का छह प्रतिशत होगी।
50 प्रतिशत राशि वेतन-भत्ता व प्रशासनिक कार्यों में खर्च होगी
इसी तरह अनुदान की राशि के लिए भी फार्मूला तय किया गया है। अनुदान की राशि का 50 प्रतिशत स्थानीय निकायों को सीधे हस्तांतरित होगी।
दो महत्वपूर्ण पहलू
पंचायती राज संस्थानों के तीनों स्तरों (जिला परिषद, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत) के बीच राशि का वितरण 15:15:70 के अनुपात में होगा।
राशि किस्तों में दी जाएगी। किसी कारणवश स्थानीय निकायों को समय से राशि नहीं मिली, तो उसके एवज में मुआवजा का भुगतान नहीं होगा।
शेष 50 प्रतिशत राशि विभिन्न विभागों द्वारा उन योजनाओं में खर्च होगी, जिनका उद्देश्य स्थानीय निकायों का विकास करना है।
वित्त विभाग ने विभाग को कराया अवगत
पिछले वर्ष तीन सदस्यीय सातवें राज्य वित्त आयोग का गठन हुआ था। उसकी अनुशंसाओं के आधार पर वित्त विभाग ने संकल्प जारी कर आवंटन और खर्च के प्रविधान से विभिन्न विभागों को अवगत करा दिया है।
आवंटित राशि में 50 प्रतिशत सामान्य निधि होगी, जो वेतन-मजदूरी, कार्यालय, न्यायिक सेवा और दूसरे प्रशासनिक कार्यों में खर्च होगी। सामान्य निधि में आधा धन पंचायत सरकार भवन के निर्माण पर खर्च होगा।
सोलर पैनल आदि पर खर्च भी इसी राशि से होगी। इसके अतिरिक्त 20 प्रतिशत अनुरक्षण निधि होगी, जो संपत्तियों की देखरेख, मरम्मत और बिजली बिल आदि पर खर्च होगी
विकास कार्यों के लिए मात्र 30 प्रतिशत निधि मिलेगी। इसका 40 प्रतिशत अंश स्थानीय योजनाओं के लिए होगा। यानी उसे किसी दूसरे मद में कतई खर्च नहीं किया जाएगा।