बिल पास कराने के बदले मांगी 45 हजार की घूस, लोकायुक्त ने जल संसाधन विभाग के दो अधिकारियों को दबोचा

ग्वालियर

प्रदेश के पन्ना जिले में सागर लोकायुक्त पुलिस ने जल संसाधन विभाग में बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार के बड़े खेल का पर्दाफाश किया है।

मझगांय बांध नहर के बिल भुगतान के एवज में रिश्वत ले रहे डिविजनल एकाउंटेंट और लिपिक को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है।

​​ग्वालियर निवासी ठेकेदार गौरव तोमर जल संसाधन विभाग के अंतर्गत मझगांय बांध की नहर का निर्माण कार्य करा रहे थे। उनके तीन पेमेंट पहले ही हो चुके थे, लेकिन चौथे और अंतिम बिल को पास करने के नाम पर अधिकारियों द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी।

बार-बार चक्कर काटने और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर ठेकेदार ने इसकी शिकायत सागर लोकायुक्त कार्यालय में दर्ज कराई।

​रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचे गए अधिकारी

​शिकायत के आधार पर लोकायुक्त की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से आज बुधवार 28 अक्टूबर दोपहर को कार्रवाई को अंजाम दिया। कार्रवाई के दौरान जल संसाधन विभाग के डीए दीपक परिहार को 15 हजार रुपये और लिपिक अरविंद पाठक को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धर दबोचा गया।

अधिकारियों द्वारा की गई इस अवैध मांग और पैसों के लेन-देन की पुष्टि के बाद लोकायुक्त पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

​ठेकेदार ने बयां किया दर्द

​शिकायतकर्ता ठेकेदार गौरव तोमर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पिछले तीन महीनों से उन्हें बिल पास कराने के लिए बेवजह दौड़ाया जा रहा था। अधिकारी फोन पर बात करने से बचते थे और व्यक्तिगत रूप से मिलकर मनचाही रकम की मांग करते थे।

स्थिति यह हो गई थी कि ठेकेदार को अपना काम और साजो-सामान तक गिरवी रखना पड़ गया था। आखिरकार तंग आकर उन्होंने लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाया और भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ यह कदम उठाया।

​प्रशासनिक हलचल तेज

​इस सनसनीखेज छापे के बाद जल संसाधन विभाग के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों में भी खौफ का माहौल है। लोकायुक्त टीम मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था।