बिहार की पिंकी ने बदली परिवार की किस्मत, जीविका से कर्ज लेकर शुरू की पेवर ब्लॉक यूनिट

गयाजी
हौसला मजबूत हो और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो मुश्किल परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। नीमचक बथानी प्रखंड की नैली पंचायत स्थित गोवडीहा गांव की पिंकी कुमारी ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से इसे साबित किया है।

कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली पिंकी आज पेवर ब्लॉक निर्माण के कारोबार से अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी इकाई परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ करीब एक दर्जन लोगों को रोजगार भी दे रही है।

एक लाख रुपये के ऋण से रखी कारोबार की नींव
पिंकी कुमारी के लिए कारोबार शुरू करने का सफर आसान नहीं था। वर्ष 2013 में जब वह संगम जीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं, उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी।

उनके पति पिंटू कुमार के पास भी रोजगार का कोई स्थायी साधन नहीं था। परिवार की जरूरतें पूरी करना चुनौती बना हुआ था।

ऐसे में पिंकी ने परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया। जीविका समूह से उन्हें एक लाख रुपये का ऋण मिला।

इसी आर्थिक सहयोग से उन्होंने पति के साथ पेवर ब्लॉक निर्माण का काम शुरू किया। शुरुआत में कारोबार स्थापित करने और बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

मेहनत से बढ़ी मांग, मजबूत हुई आर्थिक स्थिति
पेवर ब्लॉक का इस्तेमाल सड़क किनारे, घरों के आंगन, पार्क, परिसर और अन्य खुले स्थानों पर फर्श बनाने में होता है। निर्माण कार्यों में इसकी उपयोगिता को देखते हुए पिंकी ने कारोबार को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ने लगी और आसपास के क्षेत्रों में उनकी पहचान बनने लगी।

कारोबार से होने वाली आमदनी का उपयोग उन्होंने परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ व्यवसाय को मजबूत बनाने में भी किया। जरूरत पड़ने पर स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर काम को आगे बढ़ाया। समय के साथ अनुभव बढ़ा और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया।

महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
पिंकी का कहना है कि जीविका से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। आर्थिक सहयोग नहीं मिलता तो निर्माण इकाई शुरू करना मुश्किल होता। आज वह अपने पति के साथ कारोबार का और विस्तार करना चाहती हैं।

उनकी सफलता बताती है कि आर्थिक सहायता, अवसर और मेहनत के बल पर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों के लिए रोजगार भी सृजित कर सकती हैं। पिंकी की यह उपलब्धि उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना देखती हैं।