26 करोड़ की पांच मंजिला बिल्डिंग पर ताला, JP अस्पताल में मरीज परेशान; पोर्च में खड़ी हो रहीं गाड़ियां

भोपाल

राजधानी के जेपी अस्पताल में मरीजों को बेहतर और आधुनिक इलाज देने के लिए तैयार की गई नई बहुमंजिला इमारत अब खुद ही बदहाली का शिकार होने लगी है। करीब 26 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुई पांच मंजिला इमारत को मरीजों के लिए खोलने की कई समय-सीमाएं तय हो चुकी हैं, लेकिन अब तक इसका शुभारंभ नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि लंबे समय से बंद पड़ी इमारत के आसपास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होने लगा है। परिसर में शराब की बोतलें दिखाई दे रही हैं, जबकि अस्पताल के बाहर बने पोर्च में लोग मोटरसाइकिल और कार खड़ी कर रहे हैं। करीब डेढ़ साल से तैयार इस इमारत का उपयोग शुरू नहीं होने से एक तरफ मरीजों को नई सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, वहीं दूसरी तरफ खाली पड़े परिसर की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

 15 अगस्त तक शुरू करने के थे निर्देश
नई इमारत को चालू करने को लेकर प्रशासन की ओर से कई बार समय-सीमा तय की गई। हाल ही में कलेक्टर की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि हर हाल में 15 अगस्त तक नई इमारत शुरू की जाए। इसके बावजूद सितंबर शुरू हो चुका है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से यहां मरीजों को शिफ्ट करने या सेवाएं शुरू करने की कोई ठोस गतिविधि दिखाई नहीं दे रही है। इससे पहले भी भवन को शुरू करने की तारीखें तय की गई थीं। नवंबर 2025 की रिपोर्ट में भी सामने आया था कि करीब 26 करोड़ रुपए से तैयार भवन मरीजों के लिए नहीं खुल सका था। उस समय भवन को अस्पताल प्रशासन को सौंपने और तकनीकी कमियों को लेकर मामला अटका हुआ बताया गया था।

पांच मंजिल की इमारत, इलाज की सुविधाओं का विस्तार
नई इमारत जेपी अस्पताल परिसर में ही पुराने भवन के पास बनाई गई है। पांच मंजिला भवन में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त बिस्तरों और कई महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधाओं की योजना बनाई गई है।परियोजना के शुरुआती प्रस्ताव में 270 बिस्तर और चार आधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाने की बात सामने आई थी। बाद की विस्तृत योजना में भवन की क्षमता 240 बिस्तर बताई गई। इसमें आपातकालीन उपचार, शल्य चिकित्सा और अलग-अलग वार्डों के साथ जांच तथा अन्य चिकित्सा सुविधाओं को एक ही परिसर में उपलब्ध कराने की योजना थी। 2024 की योजना के मुताबिक करीब 26 करोड़ रुपए की लागत वाली इस इमारत में राज्य सरकार की करीब 19 करोड़ और केंद्र की करीब 7 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी बताई गई थी। इसमें भूतल पर आपातकालीन और अलग-अलग वार्ड, ऊपरी मंजिलों पर शल्य चिकित्सा वार्ड, निजी वार्ड और चार ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था प्रस्तावित थी। एक मंजिल पर रक्त बैंक बनाने की भी योजना थी।

इमारत पर असामाजिक तत्वों का कब्जा
नई इमारत के शुरू नहीं होने का असर अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। मरीजों और उनके परिजनों को अभी पुराने भवन की ही सीमित जगह में इलाज कराना पड़ रहा है। दूसरी ओर खाली पड़ी नई इमारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल परिसर में शराब की बोतलें मिलने और लोगों के पोर्च में वाहन खड़े करने से साफ है कि बंद भवन का इस्तेमाल धीरे-धीरे दूसरे कामों के लिए होने लगा है। यदि समय रहते यहां सुरक्षा और निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो भवन की संपत्ति को नुकसान पहुंचने के साथ मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।

निर्माण पूरा, लेकिन शुरू करने की जिम्मेदारी पर अटका मामला
नई इमारत के मामले में पहले भी निर्माण पूरा होने के बावजूद इसे अस्पताल प्रशासन को सौंपने और तकनीकी कमियों को लेकर विवाद सामने आया था। नवंबर 2025 में अस्पताल प्रबंधन की ओर से कुछ कमियों के कारण शिफ्टिंग रोके जाने की बात कही गई थी, जबकि निर्माण एजेंसी की ओर से अपना काम लगभग पूरा होने का दावा किया गया था। अब सवाल यह है कि जब प्रशासन कई बार समय-सीमा तय कर चुका है  तो अभी तक दरवाजे क्यों नहीं खुले हैं।

अधीक्षक बोले नहीं आई अभी तक कोई डेट 
जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संजय जैन ने बताया कि अभी तक शुरू करने की कोई डेट फिक्स नहीं की गई है। जल्द ही इसे शुरू किया जाएगा। गाड़ी पार्किंग को लेकर कहां की कोई डॉक्टर की गाड़ी खड़ी होगी बाइक अगर खड़ी है तो दिखाता हूं। और शराब की बोतलों को लेकर उन्हें कहा कि मै जांच करवाता हूं।