बाढ़ का पानी उतरा तो सामने आई तबाही, चित्रकूट में घर-दुकानें कीचड़ से पटीं; बिजली बहाली जारी

 चित्रकूट

सतना के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के पांच दिन में तीन बार उफान पर आने के बाद अब बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन पीछे तबाही छोड़ गया है। गलियों, दुकानों और घरों में मिट्टी और कीचड़ जमा है। कई परिवारों की गृहस्थी बर्बाद हो गई, जबकि दुकानदारों का लाखों का सामान खराब हो गया। अरे भइया, हम तो रजौला से कर्वी तक किए गए अवैध कब्जों के कारण मंदाकिनी नदी के कोप का भाजन साल के 365 दिन बनते हैं। अभी बाढ़ है तो देखिए बरवारा डायवर्जन नहर दो जगह फटने से फसलें जलमग्न हैं। गर्मी में सूखा झेलते हैं। पानी बढ़ा और नहरें ओवरफ्लो हुईं तो फिर नुकसान तय है। मंदाकिनी दोहरी मुसीबत बन गई है। बाढ़ में डुबोती है तो गर्मी में रुलाती है। ये दर्द बंधोइन बंधे के पास बाढ़ की विभीषिका देखने पहुंचे ग्रामीण राजेश कुमार का है।

यही व्यथा-कथा बंधोइन व आसपास के गांवों के हर ग्रामीण की भी है। कारण, बंधोइन बंधा ही है, जो चित्रकूट की चार पुरानी जल परियोजनाओं के साथ मंदाकिनी के जल को गर्मी में भी बचाए रखता है व 25 हजार एकड़ कृषि भूमि की सिंचित करने में मदद करता है। बाढ़ व सूखे से बचने को बंधोइन से कनकोटा गांव में मंदाकिनी के यमुना में मिलने तक आवश्यकता एक बड़े बांध की है, जो इस क्षेत्र के 60 गांवों को नया जीवन दे सकता है, जिनमें बाढ़ के पानी से अभी त्राहिमाम है। बांध बनने से बाढ़ का संकट खत्म होगा तो गर्मी में सूखा खत्म होगा व सिंचाई के लिए आत्मनिर्भरता आएगी।

पानी इतनी तेजी से आया, घर और दुकान दोनों नहीं बचा पाई
आरोग्यधाम में जनरल स्टोर और कपड़ों की दुकान चलाने वाली ममता शर्मा ने बताया कि बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि जरूरी सामान दूसरी मंजिल तक पहुंचाने का समय नहीं मिला। घर और दुकान में रखा सामान पानी और कीचड़ की चपेट में आकर खराब हो गया।

पुरानी लंका तिराहे पर फुटवियर दुकान चलाने वाले जितेंद्र ने गुरुवार को शटर खोला तो अंदर टूटा काउंटर, बिखरी अलमारी और कीचड़ में सने जूते-चप्पल मिले। उनके मुताबिक करीब 3 लाख रुपए का सामान बर्बाद हुआ है।

खाना मिल रहा, लेकिन सफाई के लिए पानी नहीं
बाढ़ प्रभावित लोगों तक प्रशासन, मठ-मंदिरों और स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से भोजन-पानी पहुंचाया जा रहा है। लोगों को राहत व्यवस्था से शिकायत नहीं है, लेकिन अब सबसे बड़ी जरूरत सफाई के पानी की है।

एमपीटी चौराहे पर चाय-नाश्ते का होटल चलाने वाली पूनम ने बताया कि बाढ़ में काफी सामान बह गया। जो सामान बचा है और होटल में जमा गंदगी, उसे साफ करने के लिए पानी उपलब्ध नहीं है।

समाजसेवी रामशिरोमणि शर्मा ने बताया कि घरों और होटलों में कीचड़ भरा है। नदी से पानी लाकर सफाई करना संभव नहीं है और नगर परिषद के कर्मचारी भी कई जगह नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने सफाई की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

मुख्य सड़क साफ, अब गलियों में युद्ध स्तर पर सफाई
गुरुवार को चित्रकूट की स्थिति में कुछ सुधार नजर आया। बाढ़ के दौरान बंद पड़ी मुख्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। सड़क पर जमा कचरा और कीचड़ भी काफी हद तक हटाया जा चुका है।

जिला प्रशासन का बड़ा अमला पिछले पांच दिनों से चित्रकूट में मौजूद है। राहत और बचाव के बाद अब शहर को सामान्य स्थिति में लाने पर फोकस है। मुख्य सड़क के बाद मोहल्लों और गलियों में सफाई तेज कर दी गई है। कीचड़ हटाने के साथ मलबा उठाया जा रहा है।

1275 में से 709 घरों की बिजली बहाल
बाढ़ और बारिश से बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई थी। चित्रकूट वितरण केंद्र के 19 ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए। इनमें से 11 ट्रांसफॉर्मर गुरुवार तक ठीक कर दिए गए, जबकि बाकी 8 पर काम जारी है।

कुल 1275 प्रभावित उपभोक्ताओं में से 709 की बिजली सप्लाई बहाल हो चुकी है। 566 उपभोक्ताओं के घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं। बारिश और कीचड़ के बीच बिजलीकर्मी नेटवर्क को जल्द सामान्य करने में जुटे हैं।

पांच दिन बाद निकली धूप, लोगों को मिली उम्मीद
गुरुवार शाम करीब 4 बजे पांच दिन बाद कुछ देर के लिए सूरज बादलों के पीछे से बाहर आया। लगातार बारिश और बाढ़ के बीच यह धूप लोगों के लिए राहत की खबर बनी। गुरुवार को बारिश नहीं होने से प्रशासन को भी सफाई और बहाली के काम में तेजी लाने का मौका मिला।

 मंदाकिनी में बाढ़ व उसके कारणों को तलाशते चार दिवसीय समाचारीय शृंखला की तीसरी कड़ी में बंधोइन से यमुना के संगम तक 38 किलोमीटर क्षेत्र में की पड़ताल की गई। बंधोइन बंधा युवाओं का बड़ा सेल्फी प्वाइंट भी है। इसलिए यहां दिन भर 50 से युवक रहते ही हैं। इस बंधे के कारण ऊपर पानी रुकने से कर्वी में इंटकवेल, मानिकपुर क्षेत्र में सुदूर फैली विंध्य पर्वतमाला में कभी डकैतों के शरणगाह रहे पाठा के पौने दो लाख कोल आदिवासियों को पानी उपलब्ध कराने वाली झांसी-मीरजापुर हाईवे पर कर्वी पुल घाट के पास वर्ष 1932 में अस्तित्व में आई पाठा जलकल योजना संचालित है।

बनकट पंप कैनाल से निकली नहरों व बरवारा डायवर्जन नहर से गांवों की 25 हजार एकड़ जमीन सिंचित होती है। हालांकि, बंधा 60 गांवों को बाढ़ की विभीषिका देता है तो गर्मी में इन्हीं गांवों के लिए सूखे के हालात पैदा करता है, क्योंकि तब इतना पानी भी इसके ऊपर से आगे नहीं बढ़ पाता है कि जल धारा भी दिखाई पड़ सके। बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह कहते हैं कि ये बंधा हटाने की मांग यदाकदा उठती है पर इसे हटाना श्रेयष्कर नहीं होगा, क्योंकि तब फिर इसके माध्यम से चल रही चारों जल परियोजनाएं दम तोड़ देंगी।

गर्मी में नदी का जल आचमन योग्य भी नहीं रहेगा। वर्तमान में बाढ़ का असर इन क्षेत्रों में है। किसान त्राहिमाम कर रहे हैं। बंधोइन माता का मंदिर भी भीषण बाढ़ में इस बार डूब गया था। मान्यता है कि मंदाकिनी की बाढ़ से बंधोइन माता ही रक्षा करती हैं। इससे साफ है कि मंदाकिनी के इस क्षेत्र में तटबंध और मजबूत करने की आवश्यकता है। बड़ा बांध अच्छा विकल्प है।

चित्रकूट के 84 कोस में ऐसे रुक सकती जलप्रलय
चित्रकूट के 84 कोस को जलप्रलय से बचाने के लिए डोडामाफी बांध, रसिन, बरुआ, ओहन व गुंता बांधों के साथ बरदहा, शरभंग, वाल्मीकि, झूरी नदियों व पहाड़ी नालों का पानी कुछ और बांध बनाकर संरक्षित करना चाहिए। इससे वर्ष भर मंदाकिनी को जल मिलेगा तो बाढ़ सूखा खत्म होगा।

बरदहा-शरभंग नदियों पर स्थित शबरी (राघव) जल प्रपात वर्ष भर पानी मिलने से आकर्षण बिखेरता रहेगा। मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग पर जलभराव रोकने में मदद मिलेगी तो मानिकपुर वाया चित्रकूटधाम कर्वी-बांदा झांसी रेलमार्ग पर मंदाकिनी पुल पर बाढ़ में ट्रेनों की गति धीमी नहीं करनी पड़ेगी।